शनिवार, 3 मार्च 2012

सोते हुए चलना

           कल रात माँ पापा दोनों डर गए .हुआ यु की ऐसे   तो रूद्र रात भर पलंग पर घूमघूम कर सोता  है कभी कभी उठ कर बैठ जाता है और फिर सो जाता है  पर कल रात पापा माँ देर रात पिक्चर देखते  रहे  .जैसे  ही सोने को हुए  रूद्र अचानक खड़ा हो गया माँ पापा ने सोचा शायद उसे सुसु लगी होगी पर ...रूद्र की आँखें बंद थी .और वो सीधा खड़ा हुआ था माँ पापा कुछ कहते इस  से पहले वह चलने लगा, सोते सोते .पापा ने तुरंत रूद्र को गोदी में ले लिया .रूद्र पापा  के ऊपर ही लुढ़क कर सो गया.पर माँ पापा को नींद ही नहीं आई की कहीं फिर न सोये सोये चलने लगे.
         माँ को याद आया की रूद्र के छोटे मामा जी भी रात में उठ कर चलने लगते थे और नानी जी उनके पैर  एक रस्सी से बांध कर सोती थी.हम्म अब लगता है माँ को भी यही करना पड़ेगा वर्ना रूद्र को कहीं बिस्तर से गिर कर चोट लग गई तो!!! 

रविवार, 8 जनवरी 2012

सच ...माँ को तो... कुछ भी नहीं पता !!

रूद्र को पढ़ाने के क्रम में मैंने उसे स्माल एल्फाबेट लिखना , सिखानेशुरु किये है

          जब उसे स्माल बी लिखना बता रही थी .वह जल्दी  समझ गया तो सोचा की क्यूँ ना इसे एक और आसान तरीका बता दूं... तो कहा "पता है रूद्र ....अगर हम कैपिटल बी के ऊपर से ये गोला हटा दे तो स्माल बी बन जाता है " रूद्र ने कहा "माँ!!! आप भी ना ...हम अभी स्माल बी बनाना सीख रहे हैं ." फिर उसने अपने आप स्माल बी बनाया  .फिर माँ उसे बी की प्रैक्टिस करता छोड़ थोडा किचन के काम में व्यस्त हो गई    .

                  थोड़ी देर बाद माँ ने उसे स्माल डी बनाना सिखाया और वापस किचन में आ    गई .फिर जब रूद्र ने खुद  से  स्माल डी लिखा  तो माँ के पास  कॉपी  पेन्सिल  ला  कर    बोला "माँ अगर हम स्माल डी के ऊपर गोला बना दे तो क्या बनेगा ?" मैंने कहा  "कुछ नहीं" फिर उसने वही सवाल किया "क्या बनेगा?" मैंने कहा  "कुछ भी नहीं बनेगा ...तुम डी तो लिखो !!"  तब रूद्र बड़ा गंभीर होकर बोला "ओफ्फो माँ...उल्टा कैपिटल बी बन जायेगा...आपको तो कुछ भी नहीं पता " माँ कुछ बोल ही नहीं पाई .

 सच माँ को तो... कुछ भी नहीं पता !!!

शुक्रवार, 6 जनवरी 2012

माँ मुझे पढाई करनी है

  आज रूद्र ने छत  पर जा कर कहा "माँ मुझे छत  पर खाना खाना है" माँ ने झटपट   सबको  छत पर खाना भेजा और अपने  बाकी काम निपटाने में लग  गई .कुछ  देर बाद रूद्र नीचे  आया बोला "माँ आज आपने  बहुत बढ़िया खाना बनाया था " माँ तो बहुत खुश हो गई क्यूंकि  आज  रूद्र ने पूरा खाना खाया  था और खुश भी था
नन्हा रूद्र नानी जी के साथ टनकपुर के बगीचे  में   
  माँ को लगा  आज माँ का  बढ़िया डे  है इसलिए  जब थोड़ी देर बाद रूद्र आया और बोला "माँ मुझे पढाई करनी है" तो माँ के मुह से तो बोल ही नहीं फूटे .माँ तो जाने  क्या  क्या  सपने  एक  पल में देख  डाली  खैर  अगले पल माँ बोली "नजर न लगे मेरे लड्डू बच्चे  को... चलो पढाई करते है " , "माँ...मा " रूद्र ने माँ को हिला कर कहा " मा... पढाई करते करते मैं कार्टून भी देखूंगा...ठीक है!!!!" माँ के मुहसे निकला "ओह्ह!!!!" आज सुबह से रूद्र ने एक बार भी कार्टून नहींदेखा था ना!
           मेरा लड्डू बच्चा  चतुर हो रहा है..अब तो  माँ को नयी जुगत भिड़ानी होगी.